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विशेषज्ञ लेख
कृषि उपयोग के लिए वर्षा जल का संग्रहण और भंडारण कैसे करें।

चूंकि भारत के अधिकांश हिस्सों में बारिश हो रही है, और किसानों ने रिकॉर्ड क्षेत्र में विभिन्न फसलें लगाई हैं। हर किसान और किसान संगठनों के लिए भी जरूरी है कि वे बारिश के पानी को स्टोर करने के तरीकों पर काम करें। वर्षा जल को एकत्र करने और संचय करने की विधि को वर्षा जल संचयन कहा जाता है।

वर्षा जल संचयन के क्या लाभ हैं?

वर्षा जल संचयन के क्या लाभ हैं?

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1 वर्षा जल अपेक्षाकृत स्वच्छ और पानी का बिल्कुल मुक्त स्रोत है।

2 आपकी जल आपूर्ति पर आपका पूर्ण नियंत्रण है। (पानी प्रतिबंध वाले शहरों के लिए आदर्श)

3 यह सामाजिक रूप से स्वीकार्य और पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार है।

4 यह आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है, और पानी के संरक्षण में मदद करता है।

5 बारिश का पानी लैंडस्केप पौधों और बगीचों के लिए बेहतर होता है क्योंकि यह क्लोरीनयुक्त नहीं होता है।

6 यह सरल तकनीकों का उपयोग करता है जो सस्ती और बनाए रखने में आसान हैं।

जल संरक्षण के लिए दो तकनीक लाभप्रद और आसान मानी जाती है :-

जल संरक्षण के लिए दो तकनीक लाभप्रद और आसान मानी जाती है :-

1 सतह जल संग्रह

2 छत प्रणाली

सतह जल संग्रह:-

सतह जल संग्रह:-

कृषि उपयोग के लिए वर्षा जल का संग्रहण और भंडारण कैसे करें।

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चूंकि भारत के अधिकांश हिस्सों में बारिश हो रही है, और किसानों ने रिकॉर्ड क्षेत्र में विभिन्न फसलें लगाई हैं। हर किसान और किसान संगठनों के लिए भी जरूरी है कि वे बारिश के पानी को स्टोर करने के तरीकों पर काम करें। वर्षा जल को एकत्र करने और संचय करने की विधि को वर्षा जल संचयन कहा जाता है।

चूंकि भारत के अधिकांश हिस्सों में बारिश हो रही है, और किसानों ने रिकॉर्ड क्षेत्र में विभिन्न फसलें लगाई हैं। हर किसान और किसान संगठनों के लिए भी जरूरी है कि वे बारिश के पानी को स्टोर करने के तरीकों पर काम करें। वर्षा जल को एकत्र करने और संचय करने की विधि को वर्षा जल संचयन कहा जाता है।

हर साल बहुत सारा पानी खेतों में ही बर्बाद हो जाता है, इस पानी को निचले हिस्से के तालाबों में खेत में नाला बनाकर और मैदानी इलाकों में जमा किया जा सकता है, जिससे न्यूनतम लागत आती है। जल संग्रहण जलाशय कई क्षेत्रों में जल संचयन का एक प्रभावी तरीका है।जिसे बहते पानी को आसानी से निचले क्षेत्रों में कुंड (तालाब लगभग 50 * 50 मीटर) या जलाशयों के निर्माण के लिए मोड़ा जा सकता है। किसान इस तरह से पानी का भंडारण करके अपनी कृषि जल समस्याओं का समाधान कर सकते हैं, लेकिन इससे अपनी आय भी बढ़ा सकते हैं।

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भूजल पुनर्भरण या गहरा रिसाव:-

भूजल पुनर्भरण या गहरा रिसाव:-

खुले क्षेत्र में वर्षा जल जल्दी बह जाता हैं, ऐसे क्षेत्र में नाली बना कर बह जाने वाले पानी के बिच समय बढ़ा कर इस जल को खेतों में गहराई तक रिसने में प्रोत्साहित किया जा सकता हैं, जिसे भूजल में वृद्धि होती हैं। भारत में कृषि अभी भी वर्षा पर निर्भर है, जिसका मुख्य स्रोत कुएं और नलकूप हैं, लेकिन लंबे समय तक उपयोग के कारण, भूजल स्तर अब कम हो रहा है, और हर साल वर्षा भी कम हो रही है, ऐसे में इस प्रकार भूजल स्तर, वर्षा जल द्वारा बढ़ाया जा सकता है।

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भूजल पुनर्भरण के लाभ :-

भूजल पुनर्भरण के लाभ :-

वर्षा जल संचयन के क्या लाभ हैं?

1 वर्षा जल अपेक्षाकृत स्वच्छ और पानी का बिल्कुल मुक्त स्रोत है।

2 आपकी जल आपूर्ति पर आपका पूर्ण नियंत्रण है। (पानी प्रतिबंध वाले शहरों के लिए आदर्श) 3 यह सामाजिक रूप से स्वीकार्य और पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार है। 4 यह आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है, और पानी के संरक्षण में मदद करता है। 5 बारिश का पानी लैंडस्केप पौधों और बगीचों के लिए बेहतर होता है क्योंकि यह क्लोरीनयुक्त नहीं होता है। 6 यह सरल तकनीकों का उपयोग करता है जो सस्ती और बनाए रखने में आसान हैं।

1 वर्षा जल अपेक्षाकृत स्वच्छ और पानी का बिल्कुल मुक्त स्रोत है।

2 आपकी जल आपूर्ति पर आपका पूर्ण नियंत्रण है। (पानी प्रतिबंध वाले शहरों के लिए आदर्श)

3 यह सामाजिक रूप से स्वीकार्य और पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार है।

4 यह आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है, और पानी के संरक्षण में मदद करता है।

5 बारिश का पानी लैंडस्केप पौधों और बगीचों के लिए बेहतर होता है क्योंकि यह क्लोरीनयुक्त नहीं होता है।

6 यह सरल तकनीकों का उपयोग करता है जो सस्ती और बनाए रखने में आसान हैं।

चेकडैम एक छोटा अस्थायी या स्थायी दोनों प्रकार का बांध होता है, जिसका निर्माण किसी खाई, गली, नहर, छोटी नदी के आसपास किया जा सकता है, इसे जल संग्रह के साथ साथ बाढ़ के पानी के प्रवाह को भी नियंत्रित किया जा सकता है, इस तरह की रचना पेड़ो की लकड़ी, पत्थर, मटर बजरी से भरे मिट्टी के बैग या ईंटों और सीमेंट से बनाया जा सकता है. इसका उपयोग भारत में व्यापक रूप से किया जा रहा है, इसका उपयोग रिसाव बांधों के रूप में भी किया जा सकता है. ऐसे बांध नदी के किनारे पर मोटे रेत परिवहन ( रेत बांधों) से बनाये जाते हैं, समय के साथ उपयोग होते-होते ये बांध स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं. ये संरचनाएं अपेक्षाकृत सस्ती होती हैं और 2-5 साल तक चलती हैं।

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चेकडैम के लाभ :-

चेकडैम के लाभ :-

1 चेकडैम की लागत लगभग ७०००- से ७०००० रुपए तक होती है, जो बांध के आकर, ऊंचाई पर निर्भर होती है।

2 चेकडैम से पानी का बहाव कम हो जाता है, जिसे मिटटी का कटाव कम हो जाता है।

3 छोटे और कम गहरे कुओ में जल स्तर बढ़ जाता है।

4 बारिश के पानी से पानी में खारा पन कम हो जाता है।

2) छत प्रणाली:-

  1. छत प्रणाली:-

छत प्रणाली द्वारा घरों और अन्य भवनों से बहने वाले वर्षा जल और तालाबों और नदियों से बहने वाले अतिरिक्त जल को उचित व्यवस्था के साथ, पाइपों द्वारा सूखे कुओं और नलकूपों तक पहुंचाया जा सकता हैं। छत प्रणाली का उपयोग शहरी और ग्रामीण दोनों जगह किया जा सकता है, जिसमे बिल्डिंग और घरो की छत से व्यर्थ जाने वाले वर्षा जल को छत पर या बिल्डिंग के पास भूमिगत टंकी बना कर एकत्रित किया जा सकता है, जिसकी लागत १० से १८ हजार तक आती है। इस एकत्रित किये गए जल का उपयोग दैनिक उपयोग और कृषि कार्य में किया जा सकता है।खुले टैंक में एकत्र किये गए जल को ब्लीचिंग पाउडर डालकर साफ़ कर सामन्य उपयोग में लिया जा सकता है।

जल संरक्षण के लिए दो तकनीक लाभप्रद और आसान मानी जाती है :-

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1 सतह जल संग्रह

2 छत प्रणाली

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