पीछे
विशेषज्ञ लेख
कृषि में ड्रोन का उपयोग

भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां परंपरागत तरीको से बड़े पैमाने पर खेती की जाती रही है, हमारे देश में सदियों से कृषि एक प्रमुख व्यवसाय के रूप में जीवन में शामिल रहा है, और साथ ही देश की खादय जरूरतों को भी पूरा करता रहा है, लेकिन बढ़ती जनसख्या को खाद्यान सुरक्षा प्रदान करने के लिए अब कृषि के परंपरागत तरीको से आगे बढ़कर आधुनिक तरीको को अपनाना जरुरी हो गया है, जिसे किसानो को बेहतर गुणवक्ता वाली उपज कम लागत में मिलेगी, जिसे उनकी आर्थिक स्तिथि में भी सुधार होगा।

समय के साथ साथ कृषि में कई बदलाव आय है, जिसने किसानो के जीवन शैली को सरल बनाया है, जैसे फसल की बुवाई, कटाई सिंचाई के लिए कई आधुनकि यंत्र और उपाए विज्ञानं ने उपलब्ध कराये है, जिसे किसनो ने अपनाया और कृषि को उन्नत बनाया है, इसी प्रकार फसल में कीटनाशक के उपयोग के लिए भी कई प्रकार के यंत्र बाजार में उपलध है लेकिन अब समय की मांग के अनुसार कृषि संबंघी कई कार्य के लिए ड्रोन का उपयोग बढ़ रहा है।

ड्रोन के प्रकार

ड्रोन के प्रकार

undefined

कृषि उपयोग के लिए ड्रोन दो प्रकार के होते हैं, फिक्स्ड विंग और मल्टी-कॉप्टर ड्रोन। फिक्स्ड-विंग ड्रोन अधिक मजबूत होते हैं, वे कठोर मौसम की स्थिति का सामना कर सकते हैं और आमतौर पर मल्टी-कॉप्टर ड्रोन की तुलना में लंबी उड़ान का समय होता है। हालांकि, फिक्स्ड-विंग ड्रोन अधिक महंगे हैं, और उनके डिजाइन के लिए उन्हें टेक-ऑफ और लैंड करने के लिए एक बड़े क्षेत्र की आवश्यकता होती है। मल्टी-कॉप्टर ड्रोन कहीं अधिक बहुमुखी हैं, उड़ने में आसान हैं और फिक्स्ड-विंग ड्रोन की तुलना में बहुत सस्ते हैं।

undefined
undefined

खेती में ड्रोन के प्रमुख उपयोग

खेती में ड्रोन के प्रमुख उपयोग

➥ कीटनाशक, खरपतवार नाशक रसायनों के छिड़काव के लिए

➥ फसल में रोगों व कीटों के फैलाव की जांच और उसके निवारण में

➥ खेतों की भौगोलिक स्थिति जानने

➥तरल और ठोस उर्वरकों का छिड़काव करने में

➥ फसल अवशेषों और पराली के निवारण के लिए जैविक रसायनों का छिड़काव करने में

➥ सिंचाई करने में

➥खेतों और जंगलों में बीजों का छिड़काव करने में

कीटनाशक और उर्वरक के छिड़काव के लिए

कीटनाशक और उर्वरक के छिड़काव के लिए

ड्रोन के द्वारा खेत में सभी जगह एक समान छिड़काव होता है।, जिसमे समय और रसायन दोनों की बचत होती है, लेकिन यदि पारंपरिक तरीके ( हाथो द्वारा ) जब रसायन का छिड़काव किया जाता है, तो सब जगह एक समान छिड़काव नहीं हो पाता। जिसमे समय और खर्च दोनों अधिक होता है। कई हानिकारक रसायनो के सीधे संपर्क में आने से कई बीमारी का भी सामना करना पड़ता है ड्रोन के द्वारा छिड़काव करने से इन रसायनो के सीधे संपर्क में आने से बचा जा सकता है।

इसलिए कृषि में ड्रोन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए, “कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन (एसएमएएम) योजना के तहत केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने कृषि ड्रोन की खरीद, किराए पर लेने और प्रदर्शन में सहायता करके इस तकनीक को किफायती बनाने के लिए आईसीएआर संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों को वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है .ड्रोन के इस्तेमाल के प्रति किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए ड्रोन खरीदने के लिए 100 फीसदी या दस लाख रुपए तक अनुदान देने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, इसके अलावा किसान उत्पादक संगठनों को ड्रोन खरीदने के लिए 75% तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी. यह वित्तीय सहायता 31 मार्च 2023 तक लागू रहेगी.

undefined

फसल में रोगों व कीटों के फैलाव की जांच निवारण

फसल में रोगों व कीटों के फैलाव की जांच निवारण

यदि किसान एक बड़े क्षेत्र में खेती कर रहे है, या फसल बड़ी हो चुकी है तो ऐसी स्तिथि में फसल में लगे किट या रोगो को देखने और पहचान करने में काफी कठिनाई और समय लगता है। जिसे उपज में हानि हो सकती है, लेकिन ड्रोन की मदत से आसानी से इनका पता लगाया जा सकता है, ड्रोन में लगे कैमेरा से स्तिथि की सही जानकारी देखी जा सकती है, और निवारण के लिए जरुरी उपाए किये जा सकते है।

undefined
undefined

खेतों की भौगोलिक स्थिति जानने

खेतों की भौगोलिक स्थिति जानने

ड्रोन की सहायता से किसान अपने खेत की सही भौगोलिक स्तिथि ( सटीक माप ) जान सकते है, जिसे हाथो से करने में अधिक समय और खर्च होता है , वर्त्तमान नियम के अनुसार नए खेत की खरीदी करते समय ड्रोन से लिए गए फोटो आवश्यक किये जा रहे है।

undefined
undefined

बीजो की बुवाई

बीजो की बुवाई

खेतो में बुवाई के लिए वैसे तो कई यंत्र/ मशीने मौजूद है, लेकिन अब ड्रोन के उपयोग से कई एकड़ में भी महज कुछ घंटो में बुवाई संभव है, गेहू, मक्का, जवार जैसी कई फसलों की बुवाई आसानी से की जा सकती है।

undefined
undefined

सिंचाई के लिए

सिंचाई के लिए

undefined
undefined

ड्रोन से कई एकड़ के क्षेत्र को आसानी से सिंचित किया जा सकता है, जिससे समय और पानी दोनों की बचत होती है। ड्रोन से सिंचाई बिजली या डीजल से चलने वाले पंपों या मोटरों की लागत से काफी सस्ती है।

undefined
undefined

पराली के निवारण के लिए

पराली के निवारण के लिए

जैसा की हम सभी जानते है, पराली कुछ क्षेत्रों में एक जटिल समस्या है, जिसे खेतो से हटाना खर्चीला और अधिक समय लेने वाली प्रक्रिया है, लेकिन ड्रोन की सहायता ऐसे जैव रसायनो का छिड़काव कुछ समय में किया जा सकता है जिसे पराली उर्वरक में परिवर्तित हो जायगी और वायु प्रदुषण भी नहीं होगा ।

उपरोक्त दी गई जानकारी का उपयोग किसान ड्रोन किराये पर भी ले कर सकते है, कई प्राइवेट और सरकारी संस्था ४०० से ६०० रुपये प्रति एकड़ की दर से सभी सुविधाए मोहिया कराती है। जो किसी भी परिस्तिथि में सामान्यतह होने वाले खर्च से काफी कम है, और समय की भी बचत करता है।

लाइसेंस कैसे प्राप्त करे

लाइसेंस कैसे प्राप्त करे

सरकार द्वारा ड्रोन उड़ाने के लिए किसान को ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग की भी व्यवस्था भी की जा रही है। क्युकी केवल डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) सर्टिफाइड पायलट ही एग्री ड्रोन उड़ा सकते हैं। दवा के छिड़काव और अन्य कामों के लिए DGCA सर्टिफाइड ड्रोन का ही इस्तेमाल किया जाना सरकार द्वारा निर्धारित किया गया है।

भारत में ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग देने के लिए अभी करीब 40 से अधिक स्कूल की व्यस्था की है, जो डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) की ओर से मान्यता प्राप्त है। लाइंसेंस प्राप्त करने के लिए आपको pariksha.dgca.gov.in पर फॉर्म D 4 भरना होगा, जिसका ₹100 शुल्क का भुगतान करना होगा, जिसे एक कंप्यूटर नंबर जारी होने के बाद आप परीक्षा के लिए पोर्टल खोले जाने पर उसी वेबसाइट पर परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं। आम तौर पर यह 7-10 दिनों की अवधि के लिए खुला रहता है, आवेदन के लिए आपकी आयु 18 वर्ष होनी चाहिए और 10वीं पास प्रमाणपत्र होना चाहिए। आपको डीजीसीए द्वारा निर्दिष्ट चिकित्सा परीक्षा और संबंधित सरकारी एजेंसी द्वारा पृष्ठभूमि की जांच के बाद परीक्षा दे कर आप लाइसेंस प्राप्त कर सकते है

undefined
undefined

इस लेख को पढ़ने के लिए धन्यवाद, हमें उम्मीद है कि आप लेख को पसंद करने के लिए ♡ के आइकन पर क्लिक करेंगे और लेख को अपने दोस्तों और परिवार के साथ भी साझा करेंगे!

हमारा मोबाइल ऐप डाउनलोड करें

चलते-फिरते फ़ार्म:हमारे ऐप के साथ कभी भी, कहीं भी वास्तविक बाजार की जानकारी पाए , वो भी अपनी भाषा में।।

google play button